जब विराट कोहली ने भारतीय क्रिकेट टीम की कमान संभाली, तो उन्होंने टीम के कल्चर में सबसे बड़ा बदलाव फिटनेस को लेकर किया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया—"कौशल चाहे कितना भी हो, अगर आप फिटनेस टेस्ट पास नहीं कर सकते तो टीम इंडिया में जगह नहीं मिलेगी।" और इस फिटनेस का सबसे बड़ा पैमाना बना यो-यो टेस्ट (Yo-Yo Intermittent Recovery Test)।
यो-यो टेस्ट क्या है? (What is the Yo-Yo Test?)
यो-यो टेस्ट डेनमार्क के फुटबॉल फिजियोलॉजिस्ट जेन्स बैंग्सबो द्वारा विकसित एक एरोबिक एंड्योरेंस टेस्ट है। यह मापता है कि एक एथलीट लगातार तेज गति से दौड़ने और बीच में थोड़े से आराम के बाद दोबारा कितनी जल्दी रिकवर (पुनर्जीवित) हो सकता है।
टेस्ट कैसे आयोजित होता है?
- मैदान पर तीन शंकु (Cones A, B और C) रखे जाते हैं। शंकु B और C के बीच की दूरी 20 मीटर होती है, जबकि A और B के बीच 5 मीटर (रिकवरी क्षेत्र) होता है।
- एक ऑडियो ट्रैक से स्वचालित 'बीप' (Beep) बजती है। खिलाड़ी को बीप बजने पर B से दौड़कर C तक जाना होता है और दूसरी बीप से पहले B पर लौटना होता है (कुल 40 मीटर दौड़)।
- इसके बाद खिलाड़ी को 10 सेकंड का एक्टिव रेस्ट (शंकु A तक टहलकर वापस B पर आना) मिलता है।
- हर स्तर (Level) के बाद बीप के बीच का समय कम होता जाता है, यानी खिलाड़ी को और तेज दौड़ना पड़ता है।
- यदि कोई खिलाड़ी दो बार समय पर लाइन नहीं छू पाता, तो उसका टेस्ट समाप्त माना जाता है और वह उसका अंतिम स्कोर होता है।
टीम इंडिया के लिए न्यूनतम कट-ऑफ स्कोर
- शुरुआत में बीसीसीआई ने न्यूनतम स्कोर 16.1 रखा था।
- बाद में इसे बढ़ाकर 16.5 और फिर 17.1 कर दिया गया।
- विराट कोहली का व्यक्तिगत यो-यो स्कोर आमतौर पर 17.2 से 19+ के बीच रहता है।
- मनीष पांडे और मयंक डागर जैसे खिलाड़ियों ने 19 से ऊपर का असाधारण स्कोर बनाया है।
डेक्स टेस्ट (DEXA Scan)
यो-यो टेस्ट के साथ-साथ अब बीसीसीआई डेक्सा स्कैन (Dual Energy X-ray Absorptiometry) भी करवाती है, जो शरीर के बोन मिनरल डेंसिटी और फैट पर्सेंटेज (Body Fat %) को सटीक रूप से मापता है।