टेस्ट क्रिकेट में द्विपक्षीय सीरीज का संदर्भ और रोमांच बढ़ाने के लिए आईसीसी ने 2019 में आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) की शुरुआत की। 2 साल के चक्र में चलने वाली इस प्रतियोगिता ने हर एक टेस्ट मैच और हर एक ओवर को महत्वपूर्ण बना दिया है। लेकिन इसकी प्वाइंट्स टेबल सामान्य टूर्नामेंटों से बिल्कुल अलग काम करती है।
WTC की अंक प्रणाली (Points System)
WTC चक्र में 9 शीर्ष टेस्ट टीमें भाग लेती हैं। प्रत्येक टीम 6 टेस्ट सीरीज खेलती है (3 घर पर और 3 विदेश में)। अंकों का वितरण निम्नलिखित है:
- जीत (Win): 12 अंक (100% अंक)
- टाई (Tie): 6 अंक (50% अंक)
- ड्रॉ (Draw): 4 अंक (33.33% अंक)
- हार (Loss): 0 अंक
रैंकिंग का पैमाना: PCT (Points Percentage) क्या है?
चूंकि सभी टीमें समान संख्या में टेस्ट मैच नहीं खेलतीं (इंग्लैंड और भारत 5-5 मैचों की सीरीज खेलते हैं जबकि अन्य देश 2-2 मैचों की), इसलिए आईसीसी कुल अंकों के बजाय अंक प्रतिशत (PCT - Points Percentage System) के आधार पर स्टैंडिंग्स तय करती है:
उदाहरण के लिए, यदि किसी टीम ने 10 टेस्ट मैच खेले हैं, तो कुल उपलब्ध अंक 120 (10 × 12) हैं। यदि टीम ने 6 मैच जीते और 1 ड्रॉ किया, तो अर्जित अंक 76 (72 + 4) हुए। उसका PCT = (76 / 120) × 100 = 63.33% होगा।
स्लो ओवर रेट की पेनल्टी (Slow Over Rate Penalty)
यदि कोई टीम तय समय में ओवर पूरे नहीं करती, तो प्रति कम ओवर के हिसाब से उसके अर्जित अंकों में से 1 अंक काट लिया जाता है। कई बार यह पेनल्टी टीमों को फाइनल की दौड़ से बाहर कर देती है!
फाइनल का नियम
2 साल के चक्र के अंत में अंक तालिका की शीर्ष 2 टीमें लॉर्ड्स या इंग्लैंड के किसी तटस्थ वेन्यू पर वन-ऑफ फाइनल मुकाबला खेलती हैं। यदि फाइनल मैच ड्रॉ या टाई रहता है, तो दोनों टीमों को संयुक्त विजेता घोषित किया जाता है।