सीमित ओवरों (ODI और T20) के क्रिकेट में जब बारिश खलल डालती है, तो सबसे पहला नाम सामने आता है—DLS Method (Duckworth-Lewis-Stern Method)। कई बार दर्शकों को यह नियम बहुत जटिल लगता है, लेकिन इसका मूल सिद्धांत बहुत सरल और न्यायसंगत है।
DLS मेथड का इतिहास
1992 के वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका को इंग्लैंड के खिलाफ जीत के लिए 13 गेंदों में 22 रन चाहिए थे। बारिश के बाद पुराने 'मोस्ट प्रोडक्टिव ओवर्स' नियम के तहत नया लक्ष्य 1 गेंद पर 21 रन कर दिया गया, जो असंभव था। इस भारी अन्याय के बाद दो अंग्रेजी सांख्यिकीविदों—फ्रैंक डकवर्थ (Frank Duckworth) और टोनी लुईस (Tony Lewis) ने यह गणितीय फॉर्मूला तैयार किया। 2014 में प्रोफेसर स्टीवन स्टर्न के सुधार के बाद इसका नाम DLS मेथड हो गया।
DLS का मूल सिद्धांत: संसाधन (Resources)
DLS मेथड का मानना है कि किसी भी टीम के पास रन बनाने के लिए दो प्राथमिक संसाधन होते हैं:
- शेष ओवर (Overs Remaining): मैच में फेंकने के लिए बची हुई गेंदें।
- शेष विकेट (Wickets in Hand): टीम के पास बचे हुए विकेट।
पारी की शुरुआत में दोनों टीमों के पास 100% संसाधन होते हैं। जैसे-जैसे गेंदें फेंकी जाती हैं और विकेट गिरते हैं, संसाधन प्रतिशत कम होता जाता है।
संशोधित टारगेट कैसे निकलता है?
- यदि पहली पारी में बारिश के कारण ओवर घटते हैं, तो दूसरी टीम को ज्यादा आक्रामक खेलना होता है, इसलिए उनका लक्ष्य प्रो-राटा बढ़ जाता है।
- यदि दूसरी पारी में बारिश आती है, तो दूसरी टीम के खोए हुए संसाधनों के अनुपात में टारगेट को घटाया जाता है।
- न्यूनतम खेल: किसी T20 मैच में परिणाम के लिए दोनों पारियों में कम से कम 5-5 ओवर, और वनडे में कम से कम 20-20 ओवर का खेल होना अनिवार्य है।