मैदान पर खड़े अंपायर इंसान हैं और उनसे गलतियां हो सकती हैं। इसी मानवीय भूल को सुधारने के लिए क्रिकेट में 2008 में DRS (Decision Review System) लागू किया गया। जब कोई कप्तान अपनी उंगलियों से हवा में 'T' का निशान बनाता है, तो पूरे स्टेडियम की धड़कनें तेज हो जाती हैं।
DRS में उपयोग की जाने वाली प्रमुख तकनीकें
1. अल्ट्रा-एज और स्निकोमीटर (UltraEdge / Snicko)
जब गेंद बल्ले के पास से गुजरती है, तो स्टंप्स में लगे बेहद संवेदनशील माइक्रोफोन (Stump Mic) ध्वनि तरंगों को रिकॉर्ड करते हैं। यदि गेंद बल्ले या दस्ताने से छूती है, तो ऑडियो वेवफॉर्म में एक तीखा स्पाइक (Spike) दिखाई देता है।
2. हॉक-आई बॉल ट्रैकिंग (Hawk-Eye Ball Tracking)
मैदान के चारों कोनों पर लगे हाई-स्पीड कैमरे गेंद की गति, टप्पा, स्विंग और उछाल को रिकॉर्ड करते हैं। इसके जरिए यह प्रेडिक्ट किया जाता है कि यदि पैड बीच में न आता तो गेंद स्टंप पर कहां लगती।
'अंपायर्स कॉल' (Umpire's Call) क्या है?
क्रिकेट प्रशंसकों के बीच सबसे ज्यादा बहस Umpire's Call पर होती है। बॉल ट्रैकिंग कोई 100% सटीक भविष्यवक्ता नहीं है, इसमें थोड़ी मार्जिन ऑफ एरर (Margin of Error) होती है।
- यदि गेंद का 50% से कम हिस्सा स्टंप से टकरा रहा हो (बेल्स या बाहरी स्टंप का किनारा छू रहा हो), तो तकनीक मैदान पर खड़े ऑन-फील्ड अंपायर के मूल फैसले का सम्मान करती है।
- यदि ऑन-फील्ड अंपायर ने Out दिया था, तो वह Out ही रहेगा।
- यदि ऑन-फील्ड अंपायर ने Not Out दिया था, तो वह Not Out ही रहेगा।
- खास बात: Umpire's Call होने पर रिव्यू मांगने वाली टीम का रिव्यू बर्बाद नहीं होता।
प्रत्येक फॉर्मेट में कितने रिव्यू मिलते हैं?
- T20 मैच: प्रत्येक टीम को प्रति पारी 2 सफल/असफल रिव्यू मिलते हैं।
- वनडे मैच: प्रत्येक टीम को प्रति पारी 2 रिव्यू मिलते हैं।
- टेस्ट मैच: प्रत्येक टीम को प्रति पारी 3 रिव्यू मिलते हैं।