त्योहारों के समय सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भारी छूट वाले विज्ञापनों की बाढ़ आ जाती है—₹50,000 का आईफोन मात्र ₹2,999 में या ₹500 में 3 ब्रांडेड जूते। हजारों लोग इस लालच में फंसकर पेमेंट कर देते हैं और न सामान आता है और न ही पैसा वापस मिलता है। इसके अलावा बैंक ओटीपी और एनीडेस्क जैसे रिमोट ऐप्स के जरिए लोगों के बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं।
साइबर फ्रॉड से बचने के 5 गोल्डन रूल्स:
- 1. URL और पैडलॉक (https://) जरूर चेक करें: हमेशा चेक करें कि वेबसाइट के पते में
https://और ताले का निशान है या नहीं। फर्जी साइट्स में स्पेलिंग में चालाकी होती है (जैसे amaz0n.in या flipk-art.in)। - 2. कभी भी अनचाही ऐप इंस्टॉल न करें: फ्रॉड कॉल करने वाले अक्सर कहते हैं कि "कूरियर रुका हुआ है, AnyDesk, TeamViewer या QuickSupport ऐप डालिए"। ये रिमोट ऐप्स आपके फोन की पूरी स्क्रीन हैकर को दिखा देती हैं।
- 3. पैसे प्राप्त करने के लिए कभी UPI PIN न डालें: याद रखें कि किसी से पैसे लेने या कैशबैक पाने के लिए कभी भी पिन डालने या क्यूआर कोड स्कैन करने की आवश्यकता नहीं होती।
- 4. अनजान साइटों पर वर्चुअल कार्ड (Virtual Card) का उपयोग करें: अपने मुख्य क्रेडिट कार्ड की जगह वन-टाइम वर्चुअल कार्ड या कैश ऑन डिलीवरी (COD) का ही उपयोग करें।
🚨 अगर फ्रॉड हो जाए तो तुरंत क्या करें?
बिना 1 मिनट भी गंवाए गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। यदि आप घटना के 2 घंटे के भीतर रिपोर्ट कर देते हैं, तो पुलिस उस पैसे को हैकर के खाते में फ्रीज करवा देती है और पैसा वापस मिल जाता है।