holi kyu manaya jata hai | क्यों मनाया जाता है होली का त्योहार Holi kab है (Holi Festival Shayari SMS In Hindi)holi kyu manaya jata hai

बुरा ना मानो होली है

Holi kab hai(Holi कब है ) ये तो भारत में सब कोई को जरूर मालूम होती है पर क्या आप जानते है की होली क्यों मनाई(holi kyu manaya jata hai ) जाती है . आइये इस पोस्ट में जानते है की Holi रंगों का त्यौहार क्यों मनाई जाती है

होली रंगों का त्योहार है। यही एकमात्र दिन है जब हमें गंदे और रंगीन होने की पूरी आजादी मिलती है। रंग, भोजन और संगीत होली का सार है। लोग संगीत और लोक गीतों पर नृत्य करते हैं। लेकिन दुर्भाग्य से, महामारी के कारण, इस वर्ष बहुत सख्त प्रतिबंध हैं

उत्साह, उमंग और उल्लास के साथ भाईचारे के रंग बिखेरने के लिए सभी बेताब हैं। बुराई पर अच्छाई की जीत के त्योहार जगह-जगह होलिका का दहन होगा और रंग गुलाल उड़ाकर खुशियां बांटी जाएंगी। हर गली-मोहल्ला रंगों के त्योहार में रमा रहेगा।

होली का त्योहार भारत में फाल्गुन महीने के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यह रंगों और खुशियों का त्योहार है। बच्चों में इस दिन बड़ा ही उत्साह रहता है। कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजन इस दिन के अवसर के लिए घरों में बनाए जाते हैं।

कहा जाता है कि इस दिन सभी लोगों को सारे गिले-शिकवे मिटाकर दोस्ती कर एक नई शुरुआत करनी चाहिए। यही इस त्योहार का उद्देश्य भी है। अहंकार पर आस्था और विश्वास की जीत के कारण यह त्योहार मनाया जाता है।

धार्मिक एवं सामाजिक एकता का पर्व होली के होलिका दहन के लिए हर चौराहे व गली-मोहल्ले में गूलरी, कंडों व लकड़ियों से बड़ी-बड़ी होली सजाई जाती हैं। वहीं बाजारों में भी होली की खूब रौनक दिखाई पड़ती है।

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होली क्या है  What is holi in hindi ?

हिंदू धर्म में होली का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।
होली बसंत का त्यौहार है और इसके आने पर सर्दी ख़त्म हो जाती है | कुछ हिस्सों में इस त्यौहार का संमंध बसंत की फसल पकने से भी है |किसान अच्छी फसल पैदा होने की खुसी में होली मनाते है |होली को वसंत महोत्सव या काम महोत्सव भी कहते हे |
इस दिन लोग आपसी कटुता और वैरभाव को भुलाकर एक-दूसरे को इस प्रकार रंग लगाते हैं कि लोग अपना चेहरा भी नहीं पहचान पाते हैं। रंग लगने के बाद मनुष्य शिव के गण के समान लगने लगते हैं जिसे देखकर भोलेशंकर भी प्रसन्न होते हैं।रंगों का त्योहार होली पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। पहले दिन होलिका जलाई जाती है, जिसे होलिका दहन कहते हैं। दूसरे दिन लोग एक-दूसरे को रंग, अबीर-गुलाल लगाते हैं। माना जाता है कि होली के दिन लोग गले-सिकवे भुलाकर गले मिलते हैं।

Holi kab hai  Holi kab है

Holi 2022 Date: 2022 में होली कब है? जानिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

17 मार्च 2022 को है. वहीं, रंगवाली होली 18 मार्च 2022

Holi 2022 Date: होली 2022 की तारीख

Purnima Tithi Begins – 01:44 PM on Mar 17, 2022
Purnima Tithi Ends – 01:02 PM on Mar 18, 2022
Holi on Friday, March 18, 2022
Holika Dahan on Thursday, March 17, 2022

क्यों मनाया जाता है होली का त्योहार? holi kyu manaya jata hai

पौराणिक मान्यता

1-नृसिंह रूप में भगवान इसी दिन प्रकट हुए थे और हिरण्यकश्यप नामक असुर का वध कर भक्त प्रहलाद को दर्शन दिए थे।

2-हिन्दू मास के अनुसार होली के दिन से नए संवत की शुरुआत होती है।

3-चैत्र कृष्ण प्रतिपदा के दिन धरती पर प्रथम मानव मनु का जन्म हुआ था।

4 -इसी दिन कामदेव का पुनर्जन्म हुआ था। इन सभी खुशियों को व्यक्त करने के लिए रंगोत्सव मनाया जाता है।

5 -त्रेतायुग में विष्णु के 8वें अवतार श्री कृष्ण और राधारानी की होली ने रंगोत्सव में प्रेम का रंग भी चढ़ाया। श्री कृष्ण होली के दिन राधारानी के गांव बरसाने जाकर राधा और गोपियों के साथ होली खेलते थे। कृष्ण की रंगलीला ने होली को और भी आनंदमय बना दिया और यह प्रेम एवं अपनत्व का पर्व बन गया

6-भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन पूतना नामक राक्षसी का वध किया था। इसी खु़शी में गोपियों और ग्वालों ने रासलीला की और रंग खेला था।

होली के इस त्यौहार से अनेको पौराणिक कहानियां जुडी हुई हैं जिनमे से सबसे प्रचलित कहानी है प्रह्लाद और उनकी भक्ति की
दीति के पुत्र हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु से घोर शत्रुता रखते थे। वे खुद से बढ़कर किसी को कुछ भी नहीं समझते थे। लेकिन उनका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था।
प्रहलाद भगवान विष्णु में बहुत आस्था रखता था और अपने पिता के मना करने पर भी वह उनकी ही पूजा करता था।

अपने बेटे की यह हरकत हिरण्यकश्यप को पसंद नही आयी.उसने कई बार प्रल्हाद को समझाने की कोशिश की लेकिन प्रल्हाद ने विष्णु की पूजा करना बंद नही किया.इस बात से क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने कई बार प्रल्हाद को मारने की कोशिश की. लेकिन हर बार भगवान विष्णु प्रल्हाद को बचा लेते.पिता के आदेश के बावजूद प्रल्हाद ने भगवान की पूजा करना जारी रखा.प्रल्हाद को अपने आदेश का भंग करता देख हिरण्यकश्यप क्रोधित हो उठा.हिरण कश्यप ने प्रल्हाद को मारने के लिए अनेक उपाय किए. परंतु हिरण्यकश्यप का हर प्रयास विफल हो जाता था.इस बात से चिंतित हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया.

होलिका अग्नि की उपासक थी.होलिका को आग में न जलने का वरदान मिला था.हिरण्यकश्यप को होलिका के इस वरदान के बारे में पता था.इसलिए हिरण्यकश्यप ने होलिका को आदेश दिया की,वह प्रल्हाद को अपने गोदी में बिठाकर अग्नि में प्रवेश करे और प्रल्हाद को जलाकर मार दे.होलिका को हिरण्यकश्यप की यह योजना पसंद आयी.वह जानती थी की अग्नि उसका कुछ नही बिगाड़ सकती.

हिरण्यकश्यप और होलिका की इस योजना को फाल्गुन पूर्णिमा की रात में अंजाम दिया गया.राज्य के बीचोबीच बड़ी चिता रची गयी.होलिका प्रल्हाद को अपनी गोदी में उठाकर चिता पर बैठ गयी.होलिका और प्रल्हाद के बैठने के बाद चिता में आग लगायी गयी.आग की लपटो ने चिता को घेर लिया.आग को देखकर हिरण्यकश्यप खुश हो उठा.वह जानता था की अब प्रल्हाद का बचना मुश्किल है.लेकिन हुआ इसके उलटा.अपने आप को आग से घिरा देख बालक प्रल्हाद मन ही मन भगवान विष्णु को स्मरण करने लगा.

अपने भक्त को संकट में देख भगवान विष्णु प्रल्हाद को बचाने आये.भगवान विष्णु ने प्रल्हाद के शरीर को आग से बचा लिया.होलिका को उसके घमंड का सबक मिला और आग में न जलने का वरदान होने के बावजूद वह खुदके घमंड के आग में जलकर मर गयी. दरअसल होलिका भूल गई थी कि वरदान उसके सुरक्षा के लिए था, ना कि किसी और के साथ कपट करने के लिए.होलिका के कपट और घमंड ने उसे भस्म कर दिया.और बालक प्रल्हाद अपने भक्ति और सच्चाई के कारण सही सलामत बच गया.

भागवत पुराण के अनुसार जिस रात यह घटना हुयी वह फाल्गुन पूर्णिमा की रात थी.इसलिए तबसे अच्छाई की बुराई पर जितके प्रतिक के तौर पर हर साल फाल्गुनी पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है.!

तभी से होली से 1 दिन पहले की रात होलिकादहन किया जाता है। इस दिन घमंड और हर तरह की बुरी चीजों और आदतों की आहुति दी जाती है। होलिका के फेरे लगाकर मंगल-कामना की जाती है और राख से तिलक लगाया जाता है। इस दिन नकारात्मकता को त्यागकर सकारात्मकता को अपनाया जाता है।

अगली सुबह रंगों से होली खेली जाती है। इन दिनों फूलों से भी होली खेलने का चलन है। मित्र, संबंधी व पड़ोसी सभी एक-दूसरे से मिलकर रंग-गुलाल लगाते हैं। छोटे, बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं।

होली महोत्सव Holi ka mahatva

बुराई पर अच्‍छाई की जीत की प्रतीक होली का सामाजिक महत्‍व भी है। यह एक ऐसा पर्व होता है जब लोग आपसी मतभेद भुलाकर एक हो जाते हैं। मान्‍यता है कि इस दिन अगर किसी को लाल रंग का गुलाल लगाया जाए तो सभी तरह के मनभेद और मतभेद दूर हो जाते हैं। क्‍योंकि लाल रंग प्‍यार और सौहार्द का प्रतीक होता है। इसलिए यह आपसी प्रेम और स्‍नेह बढ़ाता है। वहीं धार्मिक महत्‍व की बात करें तो इस दिन होलिका में सभी तरह की नकारात्‍मक शक्तियों का नाश हो जाता है और सकारात्‍मकता की शुरुआत होती है।

होली त्यौहार 2022 पर शायरी (Holi Festival Shayari SMS In Hindi) Happy Holi Wishes in Hindi

Happy Holi Wishes 2022 in hindi

नेचर का हर रंग आप पर बरसे

हर कोई आपसे होली खेलने को तरसे

रंग दे आपको सब मिलकर इतना

कि वह रंग उतरने को तरसे….
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होली के रंग बिखरेंगे,

संग पिया हम अब भीगेंगे,

होली में और भी रंग होगा

मेरे पिया जब मेरे संग होगा !!
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आपने दिल का हाल बताना छोड़ दिया,
हमने भी गहराई में जाना छोड़ दिया.
होली से पहले ही आपने
सुबह नहाना छोड़ दिया?
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गुलजार खिले हो परियों के, और मंजिल की तैयारी हो
कपड़ों पर रंग के छींटों से खुशरंग अजब गुलकारी हो
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जकल की लड़कियां नहीं हैं रोती-धोती
खुले बालों में बदल चुकी हैं उनकी चोटी
लड़कों को बैखोफ सुना देती है खरी-खोटी
बड़ी-बड़ी सफलताएं भी उन्हें लगती हैं छोटी

सेलेरीज़ लेती हैं आजकल सभी मोटी-मोटी’
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मौसम-ए-होली है दिन आए हैं रंग और राग के
हमसे तुम कुछ मांगने आओ बहाने फाग के
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मुंह पर नकाब-ए-ज़र्द हर इक ज़ुल्फ पर गुलाल
होली की शाम ही तो सहर है बसंत की
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मुहय्या सब है अब अस्बाब-ए-होली
उठो यारों भरो रंगों से झोली


राधा का रंग और कान्हा की पिचकारी

प्यार के रंग से रंग दो दुनिया सारी
,
ये रंग न जाने कोई जात न कोई बोली

मुबारक हो आपको रंग भरी होली.

हैप्पी होली!!


Holi ki Shubhkamnaye in Hindi 2022

लाल रंग आप के गालो के लिए,
काला रंग आप के बालो के लिए,
नीला रंग आप के आँखों के लिए,
पिला रंग आप के हाथो के लिए,
गुलाबी रंग आप के सपनो के लिए,
सफ़ेद रंग आप के मन के लिए,
हरा रंग आप के जीवन के लिए,
होली के इन सात रंगों के साथ,
आपकी जिंदगी रंगीन हो।
होली की हार्दिक शुभकामनायें!

होलिका के माता-पिता का क्या नाम था? होलिका किसकी पुत्री थी

वैदिक काल में कश्यप ऋषि हुए थे। उनकी पत्नी दिति थीं। जिनके के दो पुत्र हुए नाम थे हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष थे।

अगर होलिका हिरण्यकश्यप की खास बहन थी तो उनके भी पिता का नाम कश्यप ऋषि और माता का नाम दिति था।

होलिका के माता का क्या नाम था?

होलिका के माता का नाम दिति था.

होलिका क्यों जली थी?

होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका अपने भाई की सहायता करने के लिए तैयार हो गई। होलिका प्रह्लाद को लेकर चिता में जा बैठी परन्तु विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका जल कर भस्म हो गई। यह कथा इस बात का संकेत करती है कि बुराई पर अच्छाई की जीत अवश्य होती है।

होली का अर्थ क्या है?

होली शब्द का अर्थ होता है पवित्रता। मानव के जीवन में हमेशा से पवित्रता को सबसे ज़्यादा महत्व देना चाहिए.बुराई पर अच्‍छाई की जीत की प्रतीक होली का सामाजिक महत्‍व भी है। यह एक ऐसा पर्व होता है जब लोग आपसी मतभेद भुलाकर एक हो जाते हैं

List of Best Hindi Holi Songs 2022 You Must Play This Holi

Arey Jaa Re Hat NatKhat – Navrang
Holi Aayi Re – Padmaavat
O Ganga Maiya – Maahir
Go Pagal – Jolly LLB 2
Jogiji Dhire Dhire – Nadiya Ke Paar
Aao Re Aao – Nadiya Ke Paar
Pagalon Sa Naach – Junooniyat
Lahu Munh Lag Gaya – Goliyon Ki Raas Leela – Ram Leela
Holi Aayi Re Kanhai – Mother India
Ek Ladki Ne Mujhpe – Muqabla
Balam Pichkari – Yeh Jawani Hai Deewani
Holi Khele Raghuveera – Bagban
Do Me a Favour Lets Play Holi – Waqt The Race Against Time
Soni Soni Akhiyon Wale – Mohabbatein
Holi Re – Mangal Pandey The Rising
Rang Se Hui – Gulaab Gang
Rang Barse Bhige Chunar Wali – Silsila
Holi Aayi Re – Mashaal
Holiya me Ude re Gulaal – Ila Arun (Album)
Holi Ke Din – Sholay
Aaj Na Chhodenge Bas Humjoli – Kati Patang
O Khaike Paan Banaras Wala – Don
Ang Se Ang Lagana Sajan Hume Aise rang Lagana – Darr

तो, ये हैं 2022 में होली के त्योहार के लिए सर्वश्रेष्ठ गीत। अगर आपको लगता है कि आपका पसंदीदा होली गीत सूची में गायब है, तो आप उन्हें टिप्पणी अनुभाग में जोड़ सकते हैं। हम नए अनुशंसित होली गीतों के साथ सूची को अपडेट करेंगे।

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