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मां दुर्गा पूजा विधि, नवदुर्गा आराधना, महिषासुर मर्दिनी कथा, सामग्री व आरती

Hindilish टीम 31 Oct 2026 अपडेट: 01 Nov 2026 7 मिनट पढ़ें 222
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मां दुर्गा पूजा विधि, नवदुर्गा आराधना, महिषासुर मर्दिनी कथा, सामग्री व आरती
मां दुर्गा पूजा विधि, नवदुर्गा आराधना, महिषासुर मर्दिनी कथा, सामग्री व आरती

मां दुर्गा की नवरात्रि, अष्टमी-नवमी व नित्य पूजा की प्रामाणिक विधि, संपूर्ण पूजन सामग्री, घटस्थापना, महिषासुर मर्दिनी कथा, सिद्ध नवार्ण मंत्र और दुर्गा आरती।

विषय सूची

त्वरित सारांश (Quick Answer): घर पर मां दुर्गा की पूजा हेतु पूर्व या उत्तर दिशा में लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। गंगाजल से शुद्धि कर अखंड घी का दीपक या सामान्य दीपक जलाएं। मां को रोली, अक्षत, सिंदूर, लाल चुनरी और लाल गुड़हल के फूल अर्पित करें। माता को १६ श्रृंगार चढ़ाएं। इसके बाद हलवा-पूरी या काले चने व फल का भोग लगाएं। 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' नवार्ण मंत्र का १०८ बार जप करें और अंत में कपूर से दुर्गा आरती करें।
जय मां दुर्गे | महिषासुरमर्दिनी जगदम्बा नवदुर्गा आराधना, १६ श्रृंगार, सिद्ध नवार्ण मंत्र व समस्त संकट नाशिनी पूजा विधि

📋 १.

मां दुर्गा की आराधना में लाल रंग और श्रृंगार का विशेष महत्व है। पूजन सामग्री सूची:

# क. घटस्थापना व वेदी सामग्री:

  • मां दुर्गा की प्रतिमा या भव्य चित्र
  • लकड़ी की चौकी, बिछाने हेतु नया लाल सूती या रेशमी कपड़ा
  • मिट्टी का चौड़ा पात्र (जवारे बोने हेतु), स्वच्छ छनी हुई बालू-मिट्टी, जौ (जवारे)
  • तांबे या मिट्टी का कलश, आम या अशोक के ५ पत्ते, श्रीफल (जटा नारियल)
  • कलावा (मौली), गंगाजल, शुद्ध जल, रक्षासूत्र

# ख. श्रृंगार एवं अर्चन सामग्री:

  • लाल चुनरी (गोटा लगी हुई)
  • १६ श्रृंगार सामग्री: लाल सिंदूर, रोली, कुमकुम, महावर (आलता), मेंहदी, लाल कांच की चूड़ियां, बिंदी, काजल, शीशा, कंघी, पायल, इत्र
  • लाल गुड़हल के ताजे फूल या लाल गुलाब की माला
  • अक्षत (साबुत चावल), लौंग, इलायची, कपूर, सुपारी

# ग. नैवेद्य (भोग) व हवन सामग्री:

  • शुद्ध गाय के घी में बना सूजी का हलवा, पूरी और काले चने
  • बताशे, ऋतुफल (अनार, सेब, केला), सूखा नारियल (गोला)
  • पंचमेवा (काजू, बादाम, किशमिश, छुहारा, मखाना)
  • हवन सामग्री (यदि हवन करें): हवन कुंड, आम की लकड़ी, हवन सामग्री पैकेट, गुग्गल, लोबान, गाय का घी, कर्पूर
  • --

🪔 २. प्रामाणिक मां दुर्गा पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

# चरण १: शुद्धि एवं दीप प्रज्वलन

स्नान करके लाल वस्त्र धारण करें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। गंगाजल छिड़क कर स्वयं को और पूजा स्थल को पवित्र करें। शुद्ध गाय के घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।

# चरण २: संकल्प

दाएं हाथ में जल, अक्षत, सिक्का और लाल पुष्प लेकर संकल्प लें:

हे जगज्जननी मां भवानी! मैं (अपना नाम बोलें) अपने परिवार की रक्षा, सभी प्रकार के शत्रुओं, रोगों, भयों के निवारण और धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष की सिद्धि हेतु आपका पूजन कर रहा हूँ। मेरी पूजा स्वीकार करें।

# चरण ३: कलश स्थापना (नवरात्रि में)

चौकी के बाएं भाग में मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। उसके बीच में कलश स्थापित करें। कलश में जल, गंगाजल, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते रखें। ऊपर नारियल पर लाल चुनरी और कलावा लपेटकर कलश पर स्थापित करें।

# चरण ४: षोडशोपचार पूजन

आह्वान: *सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥*

स्नान: गंगाजल से मां की प्रतिमा पर छींटे दें।

वस्त्र व चुनरी: मां को लाल चुनरी ओढ़ाएं।

सिंदूर व तिलक: मां को सिंदूर, रोली और अक्षत अर्पित करें (मां को सिंदूर अत्यंत प्रिय है)।

१६ श्रृंगार अर्पण: सोलह श्रृंगार की पिटारी मां के चरणों में अर्पित करें।

पुष्प व माला: लाल गुड़हल के फूल और गुलाब की माला पहनाएं।

नैवेद्य भोग: हलवा-पूरी, चने, बताशे और फल का भोग लगाएं। इसके साथ ही दो लौंग के जोड़े और बताशे पर कपूर रखकर मां को अर्पित करें।

# चरण ५: नवार्ण मंत्र जप एवं दुर्गा सप्तशती

मां के अमोघ नवार्ण मंत्र का रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से कम से कम १०८ बार जप करें:

*ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥*

इसके बाद दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती के सिद्ध संपुट मंत्रों का पाठ करें।

# चरण ६: महाआरती व क्षमा प्रार्थना

कपूर और घी की ज्योत से मां दुर्गा की आरती करें और अंत में अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें:

अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया। दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि॥
  • --

📜 ३. मां दुर्गा की पौराणिक कथा: महिषासुर मर्दिनी प्राकट्य

मार्कंडेय पुराण के देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती) के अनुसार, प्राचीन काल में महिषासुर नामक एक अत्यंत शक्तिशाली असुर था, जिसने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या करके यह वरदान प्राप्त कर लिया था कि त्रिलोकी में किसी भी देवता, दानव, मानव या गंधर्व के हाथों उसकी मृत्यु न हो सके। वह केवल किसी स्त्री के हाथों ही मारा जा सकता था। अहंकारवश उसने सोचा कि एक अबला स्त्री उसका क्या बिगाड़ सकती है!

वरदान पाकर महिषासुर ने तीनों लोकों पर भीषण अत्याचार शुरू कर दिया। उसने स्वर्ग पर आक्रमण कर देवराज इंद्र को सिंहासन से च्युत कर दिया और स्वयं स्वर्ग का अधिपति बन बैठा।

समस्त देवता प्राण बचाकर ब्रह्मा जी की अगुवाई में भगवान विष्णु और भगवान शिव के पास पहुंचे। देवताओं की व्यथा सुनकर भगवान शिव, भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी के मुख से प्रचंड क्रोधयुक्त दिव्य तेज प्रकट हुआ। उसी समय इंद्र, यम, वरुण, अग्नि आदि सभी देवताओं का तेज भी उसमें समाहित हो गया।

उस दिव्य महातेज के पुंज से एक अत्यंत देदीप्यमान, अनुपम सुंदरी और त्रिनेत्रधारिणी पराशक्ति प्रकट हुईं, जो 'मां दुर्गा' कहलाईं:

  • भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से त्रिशूल निकालकर दिया।
  • भगवान विष्णु ने अपने चक्र से सुदर्शन चक्र दिया।
  • वरुण देव ने शंख और पाश दिया।
  • अग्नि देव ने शक्ति अस्त्र दिया।
  • पवन देव ने धनुष और बाणों से भरे तरकश दिए।
  • देवराज इंद्र ने वज्र और ऐरावत का घंटा दिया।
  • यमराज ने कालदंड दिया।
  • हिमालय पर्वत ने मां को सवारी हेतु एक परम प्रतापी सिंह भेंट किया।

समस्त अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित होकर मां दुर्गा ने ऐसा भयंकर सिंहनाद किया कि संपूर्ण पृथ्वी और आकाश कांप उठे। महिषासुर अपनी विशाल सेना लेकर मां से युद्ध करने पहुंचा। नौ दिनों तक मां दुर्गा और असुरों के बीच भीषण संग्राम हुआ। मां ने चंड-मुंड, रक्तबीज, धूम्रलोचन जैसे महाबलियों का संहार किया।

दसवें दिन महिषासुर ने भैंसे का रूप धरकर मां पर आक्रमण किया। मां दुर्गा ने अपने चरणों से महिषासुर की गर्दन दबाकर उस पर त्रिशूल से प्रहार किया और अपनी तलवार से उसका शीश काट दिया। महिषासुर के वध से तीनों लोकों में धर्म की पुनः स्थापना हुई और देवताओं ने मां को 'महिषासुर मर्दिनी' की उपाधि देकर उनकी स्तुति की।

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🕉️ ४. सिद्ध नवार्ण मंत्र एवं दुर्गा स्तुति

# १. परम सिद्ध नवार्ण महामंत्र:

*ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥*
  • *ऐं* - मां सरस्वती (ज्ञान व बुद्धि का बीज)
  • *ह्रीं* - मां महालक्ष्मी (धन व ऐश्वर्य का बीज)
  • *क्लीं* - मां महाकाली (शक्ति व आकर्षण का बीज)

# २. सर्वमंगल मांगल्ये श्लोक:

*सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।*
*शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥*

# ३. सर्वबाधा विनिर्मुक्तो श्लोक:

*सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः।*
*मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥*
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🔔 ५. मां दुर्गा जी की पावन आरती (जय अम्बे गौरी)

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निसदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ जय अम्बे गौरी...

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मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥ जय अम्बे गौरी...

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कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥ जय अम्बे गौरी...

>

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुःखहारी॥ जय अम्बे गौरी...

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कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥ जय अम्बे गौरी...

>

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥ जय अम्बे गौरी...

>

चौंसठ योगिनि गावत, नृत्य करत भैरूं।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥ जय अम्बे गौरी...

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तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पति करता॥ जय अम्बे गौरी...

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भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥ जय अम्बे गौरी...

>

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥ जय अम्बे गौरी...

>

श्री अम्बेजी की आरति, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै॥ जय अम्बे गौरी...
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ - AEO Insights)

## प्र.१: मां दुर्गा को लाल गुड़हल का फूल ही क्यों चढ़ाया जाता है?

उत्तर: लाल गुड़हल का फूल मां दुर्गा को अत्यंत प्रिय है क्योंकि इसका लाल रंग शक्ति, ऊर्जा और रजोगुण के विजय का प्रतीक है। आयुर्वेद और तांत्रिक शास्त्रों के अनुसार, गुड़हल में सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने और नकारात्मक तरंगों को नष्ट करने की अद्भुत क्षमता होती है।

## प्र.२: क्या घर में मां दुर्गा की अखंड ज्योत जलाना अनिवार्य है?

उत्तर: नहीं, यदि आपके पास नौ दिनों तक अखंड ज्योत की देखरेख और नियमों के पालन की सुविधा न हो, तो आप सुबह और शाम केवल सामान्य घी का दीपक जलाकर भी पूरी श्रद्धा से मां की पूजा कर सकते हैं। भाव और शुचिता सबसे प्रधान है।

## प्र.३: नवार्ण मंत्र का सही जप कैसे करना चाहिए?

उत्तर: नवार्ण मंत्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) का जप पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके लाल आसन पर बैठकर, रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से किया जाता है। जप करते समय मंत्र का उच्चारण स्पष्ट और शांत मन से होना चाहिए।

## प्र.४: कन्या पूजन किस तिथि को करना चाहिए—अष्टमी या नवमी?

उत्तर: दोनों ही तिथियां कन्या पूजन के लिए शास्त्र सम्मत हैं। कुछ परिवारों में महाअष्टमी के दिन महागौरी पूजन के साथ कन्या जिमाई जाती हैं, जबकि कुछ परंपराओं में महानवमी को सिद्धिदात्री पूजन और हवन के उपरांत ९ कन्याओं व १ बटुक भैरव का पूजन किया जाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

मां दुर्गा को लाल गुड़हल का फूल ही क्यों चढ़ाया जाता है?
लाल गुड़हल का फूल मां दुर्गा को अत्यंत प्रिय है क्योंकि इसका लाल रंग शक्ति, ऊर्जा और रजोगुण के विजय का प्रतीक है। आयुर्वेद और तांत्रिक शास्त्रों के अनुसार, गुड़हल में सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने और नकारात्मक तरंगों को नष्ट करने की अद्भुत क्षमता होती है।
क्या घर में मां दुर्गा की अखंड ज्योत जलाना अनिवार्य है?
नहीं, यदि आपके पास नौ दिनों तक अखंड ज्योत की देखरेख और नियमों के पालन की सुविधा न हो, तो आप सुबह और शाम केवल सामान्य घी का दीपक जलाकर भी पूरी श्रद्धा से मां की पूजा कर सकते हैं। भाव और शुचिता सबसे प्रधान है।
नवार्ण मंत्र का सही जप कैसे करना चाहिए?
नवार्ण मंत्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) का जप पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके लाल आसन पर बैठकर, रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से किया जाता है। जप करते समय मंत्र का उच्चारण स्पष्ट और शांत मन से होना चाहिए।
कन्या पूजन किस तिथि को करना चाहिए—अष्टमी या नवमी?
दोनों ही तिथियां कन्या पूजन के लिए शास्त्र सम्मत हैं। कुछ परिवारों में महाअष्टमी के दिन महागौरी पूजन के साथ कन्या जिमाई जाती हैं, जबकि कुछ परंपराओं में महानवमी को सिद्धिदात्री पूजन और हवन के उपरांत ९ कन्याओं व १ बटुक भैरव का पूजन किया जाता है।

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