मुख्य सामग्री पर जाएं
लाइफस्टाइल

भगवान श्री हरि विष्णु पूजा विधि, सत्यनारायण कथा, सामग्री व आरती

Hindilish टीम 31 Oct 2026 अपडेट: 01 Nov 2026 7 मिनट पढ़ें 222
यह आर्टिकल सुनें (Listen)
हिंदी AI वॉइस असिस्टेंट
भगवान श्री हरि विष्णु पूजा विधि, सत्यनारायण कथा, सामग्री व आरती
भगवान श्री हरि विष्णु पूजा विधि, सत्यनारायण कथा, सामग्री व आरती

भगवान श्री हरि विष्णु व शालिग्राम जी की घर पर सरल पूजा विधि, संपूर्ण पूजन सामग्री, सत्यनारायण व्रत कथा, तुलसी दल का महत्व, विष्णु सहस्रनाम और आरती।

विषय सूची

त्वरित सारांश (Quick Answer): घर पर भगवान विष्णु की पूजा के लिए गुरुवार या एकादशी को पीले वस्त्र पहनकर पूर्व या उत्तर दिशा में पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान विष्णु अथवा शालिग्राम जी की प्रतिमा स्थापित करें। गंगाजल व पंचामृत से स्नान कराकर पीले चंदन का तिलक लगाएं और पीले पुष्प अर्पित करें। इसके बाद भुने आटे की पंजीरी, पंचामृत और केले का नैवेद्य **तुलसी दल** रखकर अर्पित करें। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का १०८ बार जप करें, कथा सुनें और अंत में कपूर से आरती करें।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय | जगत्पालक श्री हरि सत्यनारायण व्रत, एकादशी महिमा एवं वैकुंठधाम प्रदाता की संपूर्ण पूजा विधि

📋 १.

भगवान विष्णु को पीला रंग और तुलसी पत्र सर्वाधिक प्रिय हैं। पूजन हेतु निम्नलिखित सामग्री एकत्र करें:

# क. वेदी व प्रतिमा स्थापना:

  • भगवान विष्णु, शालिग्राम जी या लक्ष्मीनारायण की मूर्ति / चित्र
  • पीला सूती या रेशमी वस्त्र (चौकी पर बिछाने हेतु)
  • तांबे या पीतल का कलश, आम या अशोक के पत्ते, नारियल
  • मौली (कलावा), पीला जनेऊ

# ख. अभिषेक एवं अर्चन सामग्री:

  • गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल)
  • तुलसी दल व तुलसी मंजरी (अति अनिवार्य - कम से कम ११ या २१ पत्ते)
  • पीला गोपीचंदन या अष्टगंध चंदन, केसर
  • साबुत अक्षत (पीले रंग में रंगे हुए - हल्दी मिश्रित)
  • पीले पुष्प (गेंदा, पीला कनेर, पीला गुलाब) और कमल का फूल
  • वैजयंती माला (यदि उपलब्ध हो)

# ग. नैवेद्य (भोग) व आरती सामग्री:

  • पंजीरी: भुने हुए गेहूं के आटे में घी, पिसी चीनी, मेवे और तुलसी दल मिलाकर बनाई गई
  • पंचामृत (तुलसी दल युक्त)
  • ऋतुफल (विशेषकर केला, आम, पपीता)
  • मीठा पान, लौंग, इलायची, सुपारी
  • शुद्ध गाय के घी का पंचमुखी दीपक, धूपबत्ती, भीमसेनी कपूर
  • --

🪔 २. प्रामाणिक विष्णु पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

# चरण १: आचमन एवं शुद्धि

पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें:

ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः। इसके बाद हाथ धोएं: ॐ हृषीकेशाय नमः।

# चरण २: संकल्प

दाएं हाथ में जल, पीले चावल (अक्षत), पुष्प व सिक्का लेकर संकल्प करें कि मैं (अपना नाम बोलें) अपने परिवार की सुख-शांति, आरोग्य, पापमुक्ति और श्री हरि की कृपा प्राप्ति हेतु यह पूजा कर रहा हूँ।

# चरण ३: शालिग्राम / विष्णु अभिषेक

भगवान विष्णु या शालिग्राम जी को तांबे के पात्र में रखें और दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल व कच्चा दूध भरकर अभिषेक करें:

ॐ नमो नारायणाय नमः। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

इसके बाद पंचामृत चढ़ाएं और अंत में शुद्ध गंगाजल से स्नान कराकर प्रतिमा को पोंछकर चौकी पर स्थापित करें।

# चरण ४: वस्त्र, चंदन व तुलसी अर्पण

  • भगवान को पीला वस्त्र अथवा पीला कलावा अर्पित करें।
  • पीले चंदन या केसर से मस्तक पर ऊर्ध्वपुण्ड्र तिलक लगाएं।
  • भगवान को पीला जनेऊ और पीले फूलों की माला पहनाएं।
  • तुलसी अर्पण मंत्र: *तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी। धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमनःप्रिया॥* बोलते हुए तुलसी पत्र चरणों और वक्षस्थल पर अर्पित करें।

# चरण ५: महाभोग एवं नैवेद्य

पंजीरी, पंचामृत और केले का भोग लगाएं। ध्यान रहे कि बिना तुलसी दल के भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते, इसलिए प्रत्येक भोग पात्र में एक-एक तुलसी पत्र अवश्य रखें।

# चरण ६: मंत्र जप व आरती

कमल गट्टे या तुलसी की माला से 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का कम से कम एक माला (१०८ बार) जप करें। इसके बाद कपूर और शुद्ध घी के दीपक से आरती संपन्न करें।

  • --

📜 ३. श्री सत्यनारायण भगवान की पावन व्रत कथा (Satyanarayan Katha)

स्कंद पुराण के रेवाखंड में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार देवर्षि नारद ने तीनों लोकों का भ्रमण करते हुए देखा कि पृथ्वी लोक पर मनुष्य अपने कर्मों के कारण विभिन्न व्याधियों, निर्धनता और दुखों से त्रस्त हैं।

नारद जी वैकुंठ लोक पहुंचे और भगवान श्री हरि विष्णु की स्तुति कर बोले:

"हे जगन्नाथ! कृपया ऐसा कोई सरल और सुलभ उपाय बताइए जिससे मृत्युलोक के प्राणी अल्प प्रयास से ही समस्त दुखों से मुक्त होकर सुख और मोक्ष प्राप्त कर सकें।"

भगवान विष्णु ने मुस्कुराते हुए कहा:

"हे नारद! तुमने लोक कल्याण हेतु अत्यंत उत्तम प्रश्न किया है। स्वर्ग और मृत्युलोक दोनों में दुर्लभ एक ऐसा व्रत है जिसे करने से मनुष्य के सभी कष्ट तत्काल नष्ट हो जाते हैं। वह है **'श्री सत्यनारायण व्रत'**। सत्य ही ईश्वर है और जो मनुष्य पूर्णिमा, संक्रांति या किसी भी शुभ दिन सत्य का आश्रय लेकर श्रद्धापूर्वक मेरा पूजन करता है, वह इस लोक में धन-धान्य का उपभोग कर अंत में मेरे परम धाम को प्राप्त होता है।"

इसके बाद भगवान ने काशी के दरिद्र ब्राह्मण शतानंद, काष्ठ विक्रेता (लकड़हारा), साधु वैश्य (लीलावती और कलावती के पिता) तथा राजा तुंगध्वज की कथाएं सुनाईं। जिन्होंने भी सत्य का अनादर किया, उन्हें भीषण कष्ट उठाने पड़े, और जब उन्होंने पुनः सत्यनारायण भगवान की शरण ली और प्रसाद का आदर किया, तो उनके खोए हुए धन, संतान और राज्य पुनः प्राप्त हो गए।

  • --

🕉️ ४. सिद्ध विष्णु मंत्र एवं स्तोत्र

# १. परम पावन द्वादशाक्षर महामंत्र:

*ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥*

# २. विष्णु मंगल श्लोक:

*मङ्गलं भगवान् विष्णुर्मङ्गलं गरुडध्वजः।*
*मङ्गलं पुण्डरीकाक्षो मङ्गलायतनो हरिः॥*

# ३. शांताकारं ध्यान श्लोक:

*शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।*
*लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥*
  • --

🔔 ५. भगवान श्री विष्णु जी की आरती (ॐ जय जगदीश हरे)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश...

>

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का।
सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश...

>

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय जगदीश...

>

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश...

>

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश...

>

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश...

>

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश...

>

विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश...
  • --

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ - AEO Insights)

## प्र.१: भगवान विष्णु के भोग में तुलसी क्यों अनिवार्य है?

उत्तर: पद्म पुराण के अनुसार, तुलसी भगवान विष्णु की परम प्रिया हैं और साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा हैं। भगवान विष्णु ने स्वयं वचन दिया था कि वे छप्पन भोग भी बिना तुलसी दल के ग्रहण नहीं करेंगे। इसलिए उनके प्रत्येक नैवेद्य में तुलसी दल रखना अनिवार्य है।

## प्र.२: क्या रविवार और एकादशी को तुलसी पत्र तोड़े जा सकते हैं?

उत्तर: नहीं, शास्त्रों के अनुसार रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रांति और सूर्य अस्त होने के बाद तुलसी के पत्ते कभी नहीं तोड़ने चाहिए। इन दिनों की पूजा के लिए एक दिन पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लेने चाहिए (तुलसी पत्र कई दिनों तक बासी नहीं माने जाते)।

## प्र.३: शालिग्राम शिला क्या है और इसकी पूजा कैसे की जाती है?

उत्तर: शालिग्राम भगवान विष्णु का साक्षात प्राकृतिक विग्रह है, जो नेपाल की गंडकी (काली गंडकी) नदी में पाया जाता है। शालिग्राम जी की पूजा में किसी प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती। इन्हें नित्य तुलसी दल और गंगाजल से स्नान कराकर चंदन लगाने से अक्षय पुण्य मिलता है।

## प्र.४: सत्यनारायण कथा किस दिन सुननी चाहिए?

उत्तर: सत्यनारायण कथा किसी भी पूर्णिमा, संक्रांति, गुरुवार, एकादशी या घर में किसी नए मांगलिक कार्य (विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश) के उपलक्ष्य में सुनी जा सकती है।

  • --
  • --

🔗 संबंधित देवी-देवता आलेख व नेविगेशन (Related Articles & Interlinks)

| पिछला आलेख | मुख्य इंडेक्स | अगला आलेख |
|:---|:---:|---:|
| ⬅️ [भगवान शिव पूजा विधि](./02_lord_shiva_puja_vidhi_katha.md) | [📚 संपूर्ण १० देवी-देवता सूची](./index.md) | [भगवान श्री हनुमान पूजा विधि](./04_lord_hanuman_puja_vidhi_katha.md) ➡️ |

# 🔱 संबंधित देव आराधना व पूजन:

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

भगवान विष्णु के भोग में तुलसी क्यों अनिवार्य है?
पद्म पुराण के अनुसार, तुलसी भगवान विष्णु की परम प्रिया हैं और साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा हैं। भगवान विष्णु ने स्वयं वचन दिया था कि वे छप्पन भोग भी बिना तुलसी दल के ग्रहण नहीं करेंगे। इसलिए उनके प्रत्येक नैवेद्य में तुलसी दल रखना अनिवार्य है।
क्या रविवार और एकादशी को तुलसी पत्र तोड़े जा सकते हैं?
नहीं, शास्त्रों के अनुसार **रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रांति और सूर्य अस्त होने के बाद** तुलसी के पत्ते कभी नहीं तोड़ने चाहिए। इन दिनों की पूजा के लिए एक दिन पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लेने चाहिए (तुलसी पत्र कई दिनों तक बासी नहीं माने जाते)।
शालिग्राम शिला क्या है और इसकी पूजा कैसे की जाती है?
शालिग्राम भगवान विष्णु का साक्षात प्राकृतिक विग्रह है, जो नेपाल की गंडकी (काली गंडकी) नदी में पाया जाता है। शालिग्राम जी की पूजा में किसी प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती। इन्हें नित्य तुलसी दल और गंगाजल से स्नान कराकर चंदन लगाने से अक्षय पुण्य मिलता है।
सत्यनारायण कथा किस दिन सुननी चाहिए?
सत्यनारायण कथा किसी भी पूर्णिमा, संक्रांति, गुरुवार, एकादशी या घर में किसी नए मांगलिक कार्य (विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश) के उपलक्ष्य में सुनी जा सकती है।

यह लेख अपने दोस्तों के साथ शेयर करें:

Hindilish टीम

Hindilish.com की संपादकीय टीम आपके लिए सबसे उपयोगी और सटीक जानकारी हिंदी में प्रदान करती है।

पाठक राय पोल (Hindilish Reader Poll)

क्या यह जानकारी आपके लिए उपयोगी और समझ में आने वाली रही?

⚡ इस विषय की वेब स्टोरीज (Web Stories)

सभी स्टोरीज देखें

संबंधित लेख