मुख्य सामग्री पर जाएं
लाइफस्टाइल

भगवान सूर्य देव पूजा विधि, तांबे के लोटे से अर्घ्य नियम, रविवार व्रत कथा, सामग्री व आरती

Hindilish टीम 31 Oct 2026 अपडेट: 01 Nov 2026 7 मिनट पढ़ें 223
यह आर्टिकल सुनें (Listen)
हिंदी AI वॉइस असिस्टेंट
भगवान सूर्य देव पूजा विधि, तांबे के लोटे से अर्घ्य नियम, रविवार व्रत कथा, सामग्री व आरती
भगवान सूर्य देव पूजा विधि, तांबे के लोटे से अर्घ्य नियम, रविवार व्रत कथा, सामग्री व आरती

प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य देव की सरल व प्रामाणिक पूजा विधि, सूर्य अर्घ्य के वैज्ञानिक नियम, संपूर्ण पूजन सामग्री, रविवार व्रत कथा, आदित्य हृदय स्तोत्र और आरती।

विषय सूची

त्वरित सारांश (Quick Answer): प्रातः सूर्योदय के समय स्नान कर शुद्ध तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरें। उसमें रोली, लाल चंदन, अक्षत, थोड़ा सा गुड़ और लाल गुड़हल का फूल डालें। दोनों हाथों से लोटे को सिर से ऊपर उठाकर पूर्व दिशा में सूर्य की ओर मुख कर जल की धार से सूर्य की किरणों को देखते हुए 'ॐ सूर्याय नमः' या 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' बोलते हुए तीन बार में अर्घ्य दें। अर्घ्य का जल पैरों में न पड़े, इसके लिए नीचे गमला या तांबे का पात्र रखें। अंत में तीन बार परिक्रमा करें।
ॐ ॐ सूर्याय नमः | प्रत्यक्ष देवता भगवान भास्कर तांबे के लोटे से सूर्य अर्घ्य नियम, आरोग्य लाभ, रविवार व्रत कथा व आदित्य हृदय स्तोत्र

📋 १.

भगवान सूर्य प्रत्यक्ष देव हैं। उनकी पूजा में शुद्धता और तांबे के पात्र का सर्वोच्च महत्व है:

# क. अर्घ्य पात्र एवं सामग्री:

  • शुद्ध तांबे का लोटा (Copper Kalash): (स्टील, लोहा या प्लास्टिक का प्रयोग वर्जित है)
  • शुद्ध ताजा जल एवं गंगाजल
  • रोली (कुमकुम) या लाल चंदन का चूर्ण
  • अक्षत (साबुत बिना टूटे हुए चावल)
  • लाल पुष्प (विशेषकर लाल गुड़हल या लाल कनेर)
  • थोड़ा सा शुद्ध गुड़ या शर्करा
  • अर्घ्य का जल एकत्रित करने हेतु तांबे की बड़ी थाली या गमला (पौधों की मिट्टी)

# ख. चौकी व प्रतिमा स्थापना सामग्री (रविवार व्रत हेतु):

  • सूर्य देव की प्रतिमा, सूर्य यंत्र या सात घोड़ों के रथ पर सवार सूर्य का चित्र
  • लाल रेशमी या सूती कपड़ा (चौकी पर बिछाने हेतु)
  • लाल चंदन, केसर, धूप, अगरबत्ती
  • शुद्ध गाय के घी का दीपक, कपूर

# ग. नैवेद्य (भोग) सामग्री:

  • शुद्ध गेहूं के आटे का हलवा (गुड़ और घी में निर्मित)
  • गुड़ और भुने चने, दलिया
  • लाल रंग के फल (अनार, सेब)
  • बिना नमक का सात्विक प्रसाद
  • --

🪔 २. प्रामाणिक सूर्य पूजा व अर्घ्य विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

# चरण १: समय एवं शुद्धि

सूर्य अर्घ्य का सर्वोत्तम समय सूर्योदय काल (Sunrise) होता है, जब सूर्य की किरणें लालिमा लिए हुए हों। प्रातः काल शौच व स्नान आदि से निवृत्त होकर लाल, नारंगी या पीले वस्त्र पहनें।

# चरण २: तांबे के लोटे में अर्घ्य तैयार करना

तांबे के लोटे को गंगाजल और स्वच्छ ताजे जल से भरें।

  • इसमें एक चुटकी रोली या लाल चंदन डालें (जल लालिमा युक्त हो जाए)।
  • अक्षत (चावल) डालें।
  • थोड़ा सा गुड़ डालें (सूर्य ग्रह की अनुकूलता हेतु)।
  • एक लाल गुड़हल या लाल कनेर का फूल डालें।

# चरण ३: अर्घ्य देने की सही मुद्रा (वैदिक व वैज्ञानिक नियम)

पूर्व दिशा की ओर सूर्य देव के सम्मुख खड़े हों।

दोनों हाथों से तांबे के लोटे को पकड़ें और हाथों को इतना ऊपर उठाएं कि लोटा आपके सिर के ऊपर और आंखों के सीध में आ जाए।

लोटे से जल की पतली धार छोड़ें। जल की गिरती हुई धार के बीच से सूर्य देव के दर्शन करें। (सूर्य की किरणें जल के प्रिज्म से छनकर आपकी आंखों और आज्ञा चक्र पर पड़ेंगी, जो नेत्र ज्योति और एकाग्रता को बढ़ाती हैं)।

जल अर्पित करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें:

*ॐ एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥*
*ॐ सूर्याय नमः। ॐ घृणि सूर्याय नमः॥*

जल को तीन बार में अर्पित करें।

⚠️ **महत्वपूर्ण सावधानी:** अर्घ्य का जल किसी के पैरों पर नहीं पड़ना चाहिए। इसके लिए नीचे कोई साफ गमला, तुलसी का पौधा (रविवार को छोड़कर) या तांबे का पात्र रखें। बाद में उस जल को किसी वृक्ष की जड़ में डाल दें।

# चरण ४: प्रदक्षिणा व भूमि नमन

अर्घ्य देने के पश्चात अपने स्थान पर ही घड़ी की सुई की दिशा में (Clockwise) तीन बार घूमें (प्रदक्षिणा करें):

यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च। तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे॥

इसके बाद अनामिका उंगली से जमीन पर गिरे जल की बूंद को छूकर अपने मस्तक और दोनों नेत्रों पर लगाएं।

# चरण ५: आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ

यदि समय हो तो भगवान श्री राम द्वारा रावण वध से पूर्व महर्षि अगस्त्य द्वारा उपदेशित 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ करें। यह शत्रुओं पर विजय और असाध्य रोगों से मुक्ति का अमोघ उपाय है।

  • --

📜 ३. भगवान सूर्य देव की पौराणिक व्रत कथा (Sunday Vrat Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक अत्यंत धर्मपरायण, वृद्ध ब्राह्मणी रहती थी। वह प्रत्येक रविवार को सूर्योदय से पूर्व उठकर अपने घर को गोबर से लीपकर स्वच्छ करती थी, स्नान करके भगवान सूर्य देव की पूजा करती थी और उन्हें अर्घ्य देकर भोग लगाती थी। इसके बाद ही वह स्वयं भोजन ग्रहण करती थी। सूर्य देव की कृपा से उसके घर में कभी किसी वस्तु की कमी नहीं थी और उसका शरीर पूरी तरह निरोगी था।

उस ब्राह्मणी की एक पड़ोसन थी, जिसके पास एक सुंदर गाय थी। ब्राह्मणी प्रतिदिन उसी गाय का गोबर लाकर अपना घर लीपती थी। जब पड़ोसन ने देखा कि ब्राह्मणी उसकी गाय का गोबर ले जाती है, तो ईर्ष्यावश उसने अपनी गाय को घर के अंदर बांधना शुरू कर दिया।

अगले रविवार ब्राह्मणी को घर लीपने के लिए गोबर नहीं मिला। इस कारण वह अपना घर नहीं लीप सकी और उसने भगवान सूर्य को भोग भी नहीं लगाया। नियम भंग न हो, इस भाव से उसने पूरे दिन न जल पिया और न अन्न ग्रहण किया, और भूखी-प्यासी ही सो गई।

रात्रि में भगवान सूर्य देव ने स्वप्न में ब्राह्मणी को दर्शन दिए और पूछा:

"हे माते! आज तुमने न तो मुझे भोग लगाया और न ही स्वयं भोजन किया, इसका क्या कारण है?"

वृद्धा ने रोते हुए गोबर न मिलने की सारी व्यथा कह सुनाई। भगवान सूर्य देव ने उसकी अनन्य भक्ति और निष्ठा से प्रसन्न होकर कहा:

"हे भद्रे! मैं तुम्हारी भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हूँ। मैं तुम्हें ऐसी कामधेनु गाय प्रदान करता हूँ जो तुम्हारी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करेगी और तुम्हारे घर को धन-धान्य से भर देगी।"

सुबह जब ब्राह्मणी की आंख खुली, तो उसने अपने आंगन में एक अत्यंत सुंदर, स्वर्णिम आभा वाली गाय और बछड़े को बंधा देखा। वह गाय प्रतिदिन सोने का गोबर देती थी। यह देखकर ईर्ष्यालु पड़ोसन ने राजा के पास जाकर चुगली कर दी कि इतनी दिव्य गाय तो राजमहल में होनी चाहिए। राजा के सैनिकों ने गाय को छीनकर राजमहल में बांध दिया।

किंतु राजमहल में पहुंचते ही गाय ने सोने के स्थान पर संपूर्ण महल को दुर्गंधयुक्त गोबर से भर दिया और उसी रात राजा को स्वप्न में सूर्य देव ने दंड का भय दिखाया। भयभीत राजा ने अगले ही दिन प्रातः आदरपूर्वक गाय ब्राह्मणी को लौटा दी और राज्य में घोषणा करवा दी कि प्रत्येक रविवार को सभी प्रजाजन भगवान सूर्य देव का व्रत और पूजन करें। रविवार का व्रत करने से उस राज्य के सभी रोग, महामारी और दारिद्र्य दूर हो गए।

  • --

🕉️ ४. सिद्ध सूर्य मंत्र एवं आदित्य हृदय स्तोत्र श्लोक

# १. सूर्य बीज मंत्र:

*ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥*

# २. पौराणिक सूर्य स्तुति मंत्र:

*जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्।*
*तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥*

# ३. आदित्य हृदय स्तोत्र (फलश्रुति श्लोक):

*एतैरक्षरैर्मन्त्रैः पूजयेद्रविसत्तमम्।*
*न तस्य किञ्चिद् दुर्दर्शं न तस्यास्ति भयं क्वचित्॥*
  • --

🔔 ५. भगवान सूर्य देव जी की पावन आरती

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण रूप॥ ॐ जय सूर्य...

>

सात अश्व रथ सोहे, अरुण सारथी संगे।
तिमिर विनाशक स्वामी, तेज पुंज अंगे॥ ॐ जय सूर्य...

>

ब्रह्मा विष्णु महेशा, तुमको नित्य ध्यावें।
सुर-नर-मुनि-जन सारे, पावन फल पावें॥ ॐ जय सूर्य...

>

तुम ही जल के दाता, तुम ही जीवन दाता।
अन्न-धन-वैभव तुम बिन, कोई नहिं पाता॥ ॐ जय सूर्य...

>

काश्यप-सुत बलवन्ता, भुवन-भास्कर स्वामी।
रोग-शोक सब हरियो, हे अंतर्यामी॥ ॐ जय सूर्य...

>

कंचन थाल सजाकर, जो कोई आरती गावे।
सुख-संपत्ति पाकर वह, भव से तर जावे॥ ॐ जय सूर्य...
  • --

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ - AEO Insights)

## प्र.१: सूर्य देव को जल चढ़ाने का वैज्ञानिक लाभ क्या है?

उत्तर: वैज्ञानिक दृष्टि से, प्रातःकालीन सूर्य की किरणें विटामिन डी का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत हैं। जब तांबे के लोटे से गिरती जल की धार से सूर्य की किरणों को देखा जाता है, तो जल प्राकृतिक प्रिज्म का काम करता है। यह स्पेक्ट्रम आंखों की रोशनी बढ़ाता है, त्वचा रोगों को दूर करता है, पीनियल ग्रंथि को सक्रिय कर तनाव दूर करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को मजबूत करता है।

## प्र.२: क्या सूर्य देव को प्लास्टिक या स्टील के लोटे से जल दिया जा सकता है?

उत्तर: नहीं, शास्त्रों और आयुर्वेद दोनों में केवल शुद्ध तांबे (Copper) के पात्र का ही विधान है। तांबा सूर्य का धातु माना जाता है। स्टील, लोहा और प्लास्टिक में जल की ऊर्जा नष्ट हो जाती है और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

## प्र.३: सूर्य को जल चढ़ाते समय जल की धार पैरों पर क्यों नहीं पड़नी चाहिए?

उत्तर: सूर्य को अर्पित किया गया जल पूजनीय और दिव्य ऊर्जा से युक्त होता है। उसका पैरों पर पड़ना अनादर माना जाता है। इसलिए हमेशा नीचे कोई साफ थाली, गमला या बाल्टी रखनी चाहिए ताकि जल पैरों को स्पर्श न करे।

## प्र.४: क्या रविवार के दिन नमक का सेवन करना चाहिए?

उत्तर: रविवार का व्रत रखने वाले जातकों को इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन बिना नमक का भोजन, दलिया, गेहूं की रोटी या मीठा हलवा एक समय सूर्यास्त से पहले ग्रहण करना चाहिए। इससे सूर्य दोष (आत्मविश्वास की कमी, पिता से अनबन, नेत्र विकार) समाप्त होते हैं।

  • --
  • --

🔗 संबंधित देवी-देवता आलेख व नेविगेशन (Related Articles & Interlinks)

| पिछला आलेख | मुख्य इंडेक्स | अगला आलेख |
|:---|:---:|---:|
| ⬅️ [मां सरस्वती पूजा विधि](./09_goddess_saraswati_puja_vidhi_katha.md) | [📚 संपूर्ण १० देवी-देवता सूची](./index.md) | ⏹️ *यह शृंखला का अंतिम आलेख है* ➡️ |

# 🔱 संबंधित देव आराधना व पूजन:

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सूर्य देव को जल चढ़ाने का वैज्ञानिक लाभ क्या है?
वैज्ञानिक दृष्टि से, प्रातःकालीन सूर्य की किरणें विटामिन डी का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत हैं। जब तांबे के लोटे से गिरती जल की धार से सूर्य की किरणों को देखा जाता है, तो जल प्राकृतिक प्रिज्म का काम करता है। यह स्पेक्ट्रम आंखों की रोशनी बढ़ाता है, त्वचा रोगों को दूर करता है, पीनियल ग्रंथि को सक्रिय कर तनाव दूर करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को मजबूत करता है।
क्या सूर्य देव को प्लास्टिक या स्टील के लोटे से जल दिया जा सकता है?
नहीं, शास्त्रों और आयुर्वेद दोनों में केवल **शुद्ध तांबे (Copper)** के पात्र का ही विधान है। तांबा सूर्य का धातु माना जाता है। स्टील, लोहा और प्लास्टिक में जल की ऊर्जा नष्ट हो जाती है और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
सूर्य को जल चढ़ाते समय जल की धार पैरों पर क्यों नहीं पड़नी चाहिए?
सूर्य को अर्पित किया गया जल पूजनीय और दिव्य ऊर्जा से युक्त होता है। उसका पैरों पर पड़ना अनादर माना जाता है। इसलिए हमेशा नीचे कोई साफ थाली, गमला या बाल्टी रखनी चाहिए ताकि जल पैरों को स्पर्श न करे।
क्या रविवार के दिन नमक का सेवन करना चाहिए?
रविवार का व्रत रखने वाले जातकों को इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन बिना नमक का भोजन, दलिया, गेहूं की रोटी या मीठा हलवा एक समय सूर्यास्त से पहले ग्रहण करना चाहिए। इससे सूर्य दोष (आत्मविश्वास की कमी, पिता से अनबन, नेत्र विकार) समाप्त होते हैं।

यह लेख अपने दोस्तों के साथ शेयर करें:

Hindilish टीम

Hindilish.com की संपादकीय टीम आपके लिए सबसे उपयोगी और सटीक जानकारी हिंदी में प्रदान करती है।

पाठक राय पोल (Hindilish Reader Poll)

क्या यह जानकारी आपके लिए उपयोगी और समझ में आने वाली रही?

⚡ इस विषय की वेब स्टोरीज (Web Stories)

सभी स्टोरीज देखें

संबंधित लेख