मुख्य सामग्री पर जाएं
लाइफस्टाइल

भगवान श्री राम पूजा विधि, राम नवमी व्रत कथा, राम दरबार सेवा, सामग्री व आरती

Hindilish टीम 31 Oct 2026 अपडेट: 01 Nov 2026 7 मिनट पढ़ें 221
यह आर्टिकल सुनें (Listen)
हिंदी AI वॉइस असिस्टेंट
भगवान श्री राम पूजा विधि, राम नवमी व्रत कथा, राम दरबार सेवा, सामग्री व आरती
भगवान श्री राम पूजा विधि, राम नवमी व्रत कथा, राम दरबार सेवा, सामग्री व आरती

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम व राम दरबार की प्रामाणिक पूजा विधि, संपूर्ण पूजन सामग्री लिस्ट, चैत्र राम नवमी व्रत कथा, राम रक्षा स्तोत्र, तारक मंत्र और आरती।

विषय सूची

त्वरित सारांश (Quick Answer): घर पर राम दरबार की पूजा के लिए पूर्व दिशा में चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर श्री राम, सीता जी, लक्ष्मण जी और हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें। गंगाजल से स्नान कराकर पीले चंदन का तिलक लगाएं। तुलसी दल, पीले पुष्प और जनेऊ अर्पित करें। पंजीरी, पंचामृत और मौसमी फलों का भोग लगाएं। इसके बाद 'श्री राम जय राम जय जय राम' का जप करें या राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें। अंत में कर्पूर और घी के दीपक से 'श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन' की आरती करें।
श्री रामचंद्राय नमः | मर्यादा पुरुषोत्तम राम राम दरबार पूजन, कोदंड धनुष, राम नवमी व्रत कथा व राम रक्षा स्तोत्र विधि

📋 १.

मर्यादा पुरुषोत्तम की पूजा में सादगी, पवित्रता और मर्यादा का सर्वोच्च स्थान है:

# क. वेदी व प्रतिमा स्थापना:

  • भगवान श्री राम या संपूर्ण राम दरबार (श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी, भरत, शत्रुघ्न, हनुमान जी) का चित्र या विग्रह
  • लकड़ी की चौकी, बिछाने हेतु नया पीला रेशमी या सूती कपड़ा
  • तांबे या पीतल का कलश, आम के ५ पत्ते, नारियल (मौली बंधा)
  • गंगाजल, गाय का कच्चा दूध, शुद्ध जल

# ख. अर्चन एवं श्रृंगार सामग्री:

  • पीला गोपीचंदन, अष्टगंध चंदन, रोली, कुमकुम
  • अक्षत (साबुत बिना टूटे चावल)
  • तुलसी दल व तुलसी मंजरी (अति अनिवार्य - कम से कम २१ पत्ते)
  • सुगंधित पीले पुष्प (गेंदा, कमल, चंपा) और गुलाब
  • पीला जनेऊ (यज्ञोपवीत), कलावा (मौली), इत्र

# ग. नैवेद्य (भोग) व दीप सामग्री:

  • भुने गेहूं के आटे की पंजरी (घी, शर्करा और तुलसी युक्त)
  • गाय के दूध की खीर, पंचामृत
  • ऋतुफल (विशेषकर बेर, केला, सेब)
  • पंचमेवा, मीठा पान
  • शुद्ध गाय के घी का दीपक, सुगंधित धूप, भीमसेनी कपूर
  • --

🪔 २. प्रामाणिक श्री राम पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

# चरण १: पवित्रीकरण व दीप प्रज्वलन

प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ पीले या केसरिया वस्त्र पहनें। पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर गंगाजल छिड़कें:

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥

शुद्ध गाय के घी का दीपक जलाएं।

# चरण २: संकल्प

दाएं हाथ में जल, पीले अक्षत और पुष्प लेकर संकल्प करें:

हे मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री रामचंद्र जी! मैं (अपना नाम) आपके श्रीचरणों में समस्त क्लेशों की निवृत्ति, धर्म-सदाचार की वृद्धि और आत्मिक शांति हेतु पूजन कर रहा हूँ। मेरी इस विनम्र सेवा को स्वीकार करें।

# चरण ३: अभिषेक व स्नान

राम दरबार की प्रतिमा पर दक्षिणावर्ती शंख से गंगाजल और पंचामृत अर्पित करें। इसके बाद पुनः शुद्ध जल से स्नान कराकर प्रतिमा को स्वच्छ वस्त्र से पोंछें।

# चरण ४: वस्त्र, चंदन व तुलसी अर्पण

  • भगवान श्री राम व लक्ष्मण जी को पीला जनेऊ और पीला वस्त्र अर्पित करें।
  • माता सीता को लाल चुनरी और सिंदूर अर्पित करें।
  • हनुमान जी को सिंदूर और जनेऊ चढ़ाएं।
  • भगवान श्री राम के मस्तक पर पीला चंदन लगाएं और अक्षत चढ़ाएं।
  • तुलसी दल अर्पण: भगवान श्री राम के चरणों और वक्षस्थल पर *'श्री रामाय नमः'* बोलते हुए तुलसी के पत्ते अर्पित करें।

# चरण ५: नैवेद्य (भोग) अर्पण

खीर, पंजरी, पंचामृत और फलों में तुलसी का पत्ता रखकर प्रभु के सम्मुख रखें और हाथ जोड़कर भोग स्वीकार करने की प्रार्थना करें।

# चरण ६: तारक मंत्र जप व राम रक्षा स्तोत्र

तुलसी की माला से कलियुग के परम पावन तारक मंत्र का कम से कम एक माला (१०८ बार) जप करें:

*श्री राम जय राम जय जय राम॥*

इसके बाद यदि संभव हो तो श्री राम रक्षा स्तोत्र या सुंदरकांड का पाठ करें।

# चरण ७: आरती व पुष्पांजलि

कपूर और घी के दीपक से 'श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन' की भावपूर्ण आरती करें।

  • --

📜 ३. भगवान श्री राम की पौराणिक जन्म कथा (Ram Navami Vrat Katha)

त्रेतायुग में अयोध्या के सूर्यवंशी राजा दशरथ अत्यंत धर्मात्मा, प्रतापी और प्रजावत्सल थे। किंतु वृद्धावस्था आने पर भी उनके कोई संतान नहीं थी, जिससे वे अत्यंत चिंतित रहते थे।

राजा दशरथ ने अपने कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ जी से अपनी व्यथा कही। वशिष्ठ जी ने कहा:

"हे राजन्! धीरज धरिए। आपके चार प्रतापी पुत्र होंगे जो संपूर्ण ब्रह्मांड में कीर्ति फैलाएंगे। आप ऋष्यशृंग मुनि को बुलाकर 'पुत्रकामेष्टि यज्ञ' संपन्न कराइए।"

ऋष्यशृंग मुनि ने वेदोक्त विधि से पुत्रकामेष्टि यज्ञ प्रारंभ किया। जब पूर्णाहुति हुई, तो यज्ञकुंड से साक्षात अग्निदेव हाथ में सोने के पात्र में दिव्य खीर (चरु) लेकर प्रकट हुए। अग्निदेव ने कहा:

"हे राजन्! यह देवताओं द्वारा निर्मित दिव्य पायस (खीर) है। इसे अपनी रानियों को खिला दो, इससे तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी।"

राजा दशरथ ने उस खीर का आधा भाग अपनी बड़ी रानी कौशल्या को दिया। शेष आधे का आधा भाग रानी सुमित्रा को दिया और बचा हुआ भाग रानी कैकेयी को दिया। कैकेयी ने अपने भाग में से आधा भाग पुनः सुमित्रा को दिया।

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को, जब सूर्य अपने चरम पर था (दोपहर ठीक १२ बजे), पुष्य नक्षत्र और कर्क लग्न में, भगवान श्री हरि विष्णु ने माता कौशल्या के गर्भ से श्री राम के रूप में अवतार लिया। कैकेयी के गर्भ से भरत और सुमित्रा के गर्भ से लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ।

चारों ओर गगन से पुष्प वर्षा होने लगी। देवता विमानों में बैठकर दुंदुभियां बजाने लगे। संपूर्ण अयोध्या नगरी में उत्सव और आनंद छा गया। गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस पावन क्षण का वर्णन करते हुए लिखा:

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥

भगवान श्री राम ने अपने संपूर्ण जीवन में मर्यादा, पितृ-भक्ति, सत्य और धर्म का पालन करके यह सिद्ध किया कि विपत्ति कितनी भी बड़ी हो, मनुष्य को कभी अपने धर्म और मर्यादा का त्याग नहीं करना चाहिए।

  • --

🕉️ ४. सिद्ध श्री राम मंत्र एवं राम रक्षा स्तोत्र श्लोक

# १. परम तारक मंत्र:

*श्री राम जय राम जय जय राम॥*

# २. राम स्तुति (गोस्वामी तुलसीदास कृत):

*श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्।*
*नवकंज लोचन, कंज मुख, कर कंज, पद कंजारुणम्॥*

# ३. राम रक्षा स्तोत्र मूल श्लोक:

*रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे*
*रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः।*
*रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहं*
*रामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर॥*
  • --

🔔 ५. भगवान श्री रामचंद्र जी की पावन आरती

आरती कीजै श्री रघुवर जी की। परम पुनीत मीत सीता जी की॥

>

संतत संतत सभा सुहावन। जानकी नाथ सकल दुख भावन॥
आरती कीजै श्री रघुवर जी की...

>

जलद स्याम घन स्याम मनोहर। पीत वसन सोहे तन सुंदर॥
मुकुट बिराजत सीस मुकुट मनि। आरती कीजै श्री रघुवर जी की...

>

अंगद सुग्रीव बिभीषन सेवत। हनुमत लषन भरत कर फेरत॥
आरती कीजै श्री रघुवर जी की...

>

जाकी कृपा कटै भव बंधन। सोई रघुनाथ भगत मन रंजन॥
आरती कीजै श्री रघुवर जी की...

>

व्यास दास कहै जो जन गावै। राम परम पद सहजहिं पावै॥
आरती कीजै श्री रघुवर जी की...
  • --

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ - AEO Insights)

## प्र.१: भगवान श्री राम की पूजा में 'राम दरबार' का होना क्यों आवश्यक माना जाता है?

उत्तर: भगवान श्री राम कभी अकेले नहीं रहते। माता सीता उनकी शक्ति हैं, लक्ष्मण जी सेवा और समर्पण के प्रतीक हैं, और हनुमान जी अनन्य शरणागति के प्रतीक हैं। राम दरबार की पूजा करने से परिवार में प्रेम, त्याग, बंधुत्व और वफादारी के संस्कार जागृत होते हैं।

## प्र.२: 'राम' नाम को तारक मंत्र क्यों कहा जाता है?

उत्तर: शास्त्रों के अनुसार, 'रा' शब्द अग्नि बीज है जो समस्त पापों को भस्म करता है, और 'म' शब्द अमृत बीज है जो मन को शांति और मोक्ष प्रदान करता है। स्वयं देवाधिदेव महादेव काशी में मरने वाले जीवों के कान में 'राम' नाम का ही उपदेश देकर उन्हें भवसागर से पार कराते हैं।

## प्र.३: श्री राम नवमी की पूजा का सबसे श्रेष्ठ समय क्या होता है?

उत्तर: श्री राम नवमी के दिन भगवान श्री राम का प्राकट्य दोपहर ঠিক १२ बजे हुआ था। इसलिए मध्याह्न काल (दोपहर ११:३० से १२:३० के बीच) का समय भगवान श्री राम के जन्मोत्सव, अभिषेक और आरती के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

## प्र.४: क्या घर में धनुष-बाण लिए हुए श्री राम का चित्र रखना चाहिए?

उत्तर: हां, कोदंड धनुष धारण किए भगवान श्री राम मर्यादा, अधर्म पर धर्म की विजय और पारिवारिक सुरक्षा के प्रतीक हैं। हालांकि, घर के मंदिर के लिए सौम्य भाव वाला 'राम दरबार' (जिसमें माता सीता और लक्ष्मण जी साथ हों) सर्वोत्तम माना जाता है।

  • --
  • --

🔗 संबंधित देवी-देवता आलेख व नेविगेशन (Related Articles & Interlinks)

| पिछला आलेख | मुख्य इंडेक्स | अगला आलेख |
|:---|:---:|---:|
| ⬅️ [भगवान श्री कृष्ण पूजा विधि](./07_lord_krishna_puja_vidhi_katha.md) | [📚 संपूर्ण १० देवी-देवता सूची](./index.md) | [मां सरस्वती पूजा विधि](./09_goddess_saraswati_puja_vidhi_katha.md) ➡️ |

# 🔱 संबंधित देव आराधना व पूजन:

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

भगवान श्री राम की पूजा में 'राम दरबार' का होना क्यों आवश्यक माना जाता है?
भगवान श्री राम कभी अकेले नहीं रहते। माता सीता उनकी शक्ति हैं, लक्ष्मण जी सेवा और समर्पण के प्रतीक हैं, और हनुमान जी अनन्य शरणागति के प्रतीक हैं। राम दरबार की पूजा करने से परिवार में प्रेम, त्याग, बंधुत्व और वफादारी के संस्कार जागृत होते हैं।
'राम' नाम को तारक मंत्र क्यों कहा जाता है?
शास्त्रों के अनुसार, 'रा' शब्द अग्नि बीज है जो समस्त पापों को भस्म करता है, और 'म' शब्द अमृत बीज है जो मन को शांति और मोक्ष प्रदान करता है। स्वयं देवाधिदेव महादेव काशी में मरने वाले जीवों के कान में 'राम' नाम का ही उपदेश देकर उन्हें भवसागर से पार कराते हैं।
श्री राम नवमी की पूजा का सबसे श्रेष्ठ समय क्या होता है?
श्री राम नवमी के दिन भगवान श्री राम का प्राकट्य दोपहर ঠিক १२ बजे हुआ था। इसलिए मध्याह्न काल (दोपहर ११:३० से १२:३० के बीच) का समय भगवान श्री राम के जन्मोत्सव, अभिषेक और आरती के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
क्या घर में धनुष-बाण लिए हुए श्री राम का चित्र रखना चाहिए?
हां, कोदंड धनुष धारण किए भगवान श्री राम मर्यादा, अधर्म पर धर्म की विजय और पारिवारिक सुरक्षा के प्रतीक हैं। हालांकि, घर के मंदिर के लिए सौम्य भाव वाला 'राम दरबार' (जिसमें माता सीता और लक्ष्मण जी साथ हों) सर्वोत्तम माना जाता है।

यह लेख अपने दोस्तों के साथ शेयर करें:

Hindilish टीम

Hindilish.com की संपादकीय टीम आपके लिए सबसे उपयोगी और सटीक जानकारी हिंदी में प्रदान करती है।

पाठक राय पोल (Hindilish Reader Poll)

क्या यह जानकारी आपके लिए उपयोगी और समझ में आने वाली रही?

⚡ इस विषय की वेब स्टोरीज (Web Stories)

सभी स्टोरीज देखें

संबंधित लेख