लोन लेते समय बैंक आपसे पूछते हैं कि आप Fixed Rate चाहते हैं या Floating Rate। दोनों के अपने नफा-नुकसान हैं।
\n\nफिक्स्ड ब्याज दर (Fixed Interest Rate) क्या है?
\nइसमें लोन की पूरी अवधि के दौरान ब्याज दर एक जैसी रहती है। बाजार में ब्याज दरें बढ़ें या घटें, आपकी EMI नहीं बदलती। यह उन लोगों के लिए अच्छा है जो निश्चित बजट पसंद करते हैं।
\n\nफ्लोटिंग ब्याज दर (Floating Interest Rate) क्या है?
\nयह RBI के रेपो रेट और बेंचमार्क से जुड़ा होता है। जब रिजर्व बैंक रेपो रेट घटाता है तो आपकी ब्याज दर कम हो जाती है, और जब रेपो रेट बढ़ता है तो आपकी दर बढ़ जाती है।
\n\nतुलना: कौन सा विकल्प बेहतर है?
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- होम लोन के लिए: हमेशा Floating Rate बेहतर माना जाता है क्योंकि लंबी अवधि (15-20 वर्ष) में ब्याज दरें औसतन नीचे आती हैं और कोई प्रीपेमेंट चार्ज नहीं लगता। \n
- कार लोन या पर्सनल लोन के लिए: अक्सर फिक्स्ड रेट ही मिलता है जो छोटी अवधि के लिए सुरक्षित होता है। \n