Facebook Name Change :जानें अब किस नाम से होगी पहचान Facebook का

Facebook Name Change kyu huwa | जानें अब किस नाम से होगी पहचान Facebook का | Metaverse kya hai | What is Metaverse in Hindi

Facebook New Name: facebook को लेकर मार्क जुकरबर्ग ने 2021 के October मे बड़ा एलान किया है. नए नाम को लेकर हर कोई अपना अपना अनुमान लगा रहा था लेकिन जुकरबर्ग ने नया नाम देकर सबको चौंका दिया है.

Facebook Name Change kyu huwa
Facebook Name Change kyu huwa

Facebook New Name: गुरुवार को Facebook के CEO मार्क जुकरबर्ग ने बड़ी घोषणा की है. इस घोषणा में FACEBOOK का नाम बदलकर मेटा(Meta-A Social Technology Company) कर दिया गया है. मेटा मेटावर्स बनाने में मदद करेगा. एक ऐसी जगह जहां हम खेलेंगे और 3डी तकनीक के जरिए एक दूसरे से जुड़ेंगे. सामाजिक जुड़ाव के अगले चैप्टर में आपका स्वागत है.

मेटा ऐसी तकनीकों का निर्माण करता है जो लोगों को जुड़ने, समुदायों को खोजने और व्यवसायों को विकसित करने में मदद करती हैं। 2004 में जब फेसबुक लॉन्च हुआ, तो इसने लोगों के जुड़ने के तरीके को बदल दिया। मैसेंजर, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे ऐप्स ने दुनिया भर के अरबों लोगों को और सशक्त बनाया है। अब, मेटा 2डी स्क्रीन से आगे बढ़कर सामाजिक प्रौद्योगिकी में अगला विकास बनाने में मदद करने के लिए संवर्धित और आभासी वास्तविकता जैसे इमर्सिव अनुभवों की ओर बढ़ रहा है।

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मेटावर्स क्या है (What is Metaverse in Hindi?) Metaverse kya hai?

एक वर्चुअल-रियलिटी स्पेस जिसमें उपयोगकर्ता कंप्यूटर से उत्पन्न वातावरण और अन्य उपयोगकर्ताओं के साथ बातचीत कर सकते हैं।

वर्चुअल कम्युनिटी की एक ऐसी दुनिया होगी जहां लोग आपस में मिल सकेंगे, काम कर सकेंगे और खेल सकेंगे. इसके लिए उनके वर्चुअल रियलिटी हेडसेट्स, ऑगमेंटेड रियलिटी ग्लासेस, स्मार्टफोन ऐप्स और अन्य डिवाइसों की जरूरत पड़ेगी

What is Metaverse in Hindi?

FACEBOOK की ओर से यह नाम ऐसे वक्त में बदला गया है जब facebook के ऊपर कई देशों में ऑनलाइन सुरक्षा, भड़काऊ कंटेंट को नहीं रोकने को लेकर सवाल उठने लगे हैं. भारत सरकार की ओर से भी facebook को खत भेजकर Social मीडिया कंपनी की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले Algorithm और प्रक्रियाओं का विवरण मांगा गया है.

मेटावर्स क्या है और यह कैसे काम करेगा?

क्योंकि मेटावर्स लगातार विकसित हो रहा है, इस बात की पूरी संभावना है कि जब तक यह आज की कल्पना की जा रही है, तब तक यह बहुत अधिक भव्य और अधिक प्रभावशाली होगा।

यह पहली बार साहित्य में नील स्टीफेंसन द्वारा 1992 के अपने डायस्टोपियन उपन्यास स्नो क्रैश में इस्तेमाल किया गया था। पुस्तक में, मेटावर्स को इंटरनेट के अंतिम विकास के रूप में प्रस्तुत किया गया है – एक प्रकार की आभासी वास्तविकता जहां किसी भी आभासी बातचीत का वास्तविक दुनिया पर भी सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

और कौन सी कम्पनीज मेटावर्स पर काम कर रही हैं?

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