टेस्ट क्रिकेट 5 दिनों तक चलने वाला धैर्य का खेल है जिसमें दोनों टीमों को दो-दो पारियां खेलनी होती हैं। लेकिन जब पहली पारी में एक टीम बहुत बड़ा स्कोर बना लेती है और दूसरी टीम बहुत कम स्कोर पर सिमट जाती है, तब लागू होता है फॉलो-ऑन (Follow-on) का नियम।
फॉलो-ऑन क्या है?
सामान्य टेस्ट मैच में टीम A बल्लेबाजी करती है, फिर टीम B, फिर टीम A और अंत में टीम B। लेकिन जब टीम B पहली पारी में बहुत कम रन बनाती है, तो टीम A का कप्तान उसे लगातार दूसरी पारी खेलने का आदेश दे सकता है। इसे ही फॉलो-ऑन देना कहते हैं।
फॉलो-ऑन देने के लिए कितने रनों की लीड चाहिए?
मैच के दिनों की संख्या के आधार पर रनों का अंतर तय होता है:
- 5 दिवसीय टेस्ट मैच: पहली पारी में कम से कम 200 रन की बढ़त (Lead) होना अनिवार्य है।
- 3 या 4 दिवसीय मैच (घरेलू मैच): कम से कम 150 रन की बढ़त चाहिए।
- 2 दिवसीय मैच: कम से कम 100 रन की बढ़त चाहिए।
- 1 दिवसीय मैच (दो पारियों का): कम से कम 75 रन की बढ़त चाहिए।
क्या फॉलो-ऑन देना अनिवार्य है?
नहीं! 200 से अधिक रनों की बढ़त हासिल करने के बाद भी यह पूरी तरह पहली टीम के कप्तान की मर्जी (Discretion) पर निर्भर करता है कि वह फॉलो-ऑन दे या खुद दोबारा बल्लेबाजी करके बड़ा लक्ष्य सेट करे। कई बार गेंदबाज थक चुके होते हैं, इसलिए कप्तान फॉलो-ऑन नहीं देते।
कोलकाता 2001: ऐतिहासिक फॉलो-ऑन मुकाबला
ईडन गार्डन्स में ऑस्ट्रेलिया के 445 रनों के जवाब में भारत 171 पर सिमट गया और स्टीव वॉ ने फॉलो-ऑन दे दिया। इसके बाद वीवीएस लक्ष्मण (281) और राहुल द्रविड़ (180) की करिश्माई साझेदारी और हरभजन सिंह की हैट्रिक के दम पर भारत ने फॉलो-ऑन खेलने के बावजूद ऑस्ट्रेलिया को 171 रनों से हराकर इतिहास रच दिया था।